भारत की 6G तकनीक में ऐतिहासिक छलांग: भारतीय शोधकर्ताओं ने दर्ज कराए 3,000+ पेटेंट, वैश्विक मानकों का नेतृत्व
दूरसंचार विभाग (DoT) और भारत 6G अलायंस (B6GA) ने घोषणा की है कि अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के 'IMT-2030' मानकों के तहत भारतीय अनुसंधान संस्थानों और टेक कंपनियों ने 3,000 से अधिक बौद्धिक संपदा अधिकार (पेटेंट) दर्ज करा दिए हैं। भारत अब केवल दूरसंचार उपकरणों का उपभोक्ता नहीं बल्कि 6G प्रोटोकॉल और आर्किटेक्चर तय करने वाला प्रमुख वैश्विक निर्माता बन चुका है।

6G में भारत का परचम: भारतीय शोधकर्ताओं ने 3,000 से अधिक वैश्विक पेटेंट कराए दर्ज
भारत ने वैश्विक दूरसंचार परिदृश्य में ऐतिहासिक बदलाव का नेतृत्व करते हुए 6G तकनीक के अनुसंधान एवं विकास में अपनी निर्णायक स्थिति दर्ज कराई है। केंद्रीय संचार मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक श्वेतपत्र के अनुसार, भारत 6G अलायंस के तत्वावधान में आईआईटी मद्रास, सी-डॉट (C-DOT), भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और निजी टेलीकॉम ऑपरेटरों ने मिलकर 3,150 से अधिक पेटेंट दाखिल किए हैं।
टेराहर्ट्ज़ स्पेक्ट्रम और एआई-संवर्धित इंटेलिजेंट नेटवर्क
दाखिल किए गए पेटेंटों में टेराहर्ट्ज़ (THz) फ्रीक्वेंसी बैंड, इंटेलिजेंट रिफ्लेक्टिंग सरफेसेज (RIS) और मशीन-टू-मशीन अल्ट्रा-लो लेटेंसी संचार के पेटेंट शामिल हैं। 6G तकनीक वर्तमान 5G नेटवर्क की तुलना में 100 गुना अधिक डेटा ट्रांसफर स्पीड (1 टेराबिट प्रति सेकंड तक) और 0.1 मिलीसेकंड से कम की लेटेंसी प्रदान करेगी, जिससे रिमोट सर्जरी, ऑटोनॉमस फ्लाइंग मोबिलिटी और होलोग्राफिक टेलीप्रजेंस संभव हो सकेगा।
सरकार ने 6G अनुसंधान के लिए ₹2,000 करोड़ के समर्पित फंड की घोषणा की है। वैश्विक स्तर पर जीएसएमए (GSMA) और वन6जी (one6G) संघों ने भारतीय पेटेंट पूल को 6G के वैश्विक मानक विनिर्देशों में शामिल करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे भारत भविष्य में अरबों डॉलर की बौद्धिक रॉयल्टी अर्जित करेगा।
🔗सत्यापित स्रोत एवं संदर्भ (Verified Sources)
- Department of Telecommunications (DoT):https://dot.gov.in
- Press Information Bureau (PIB):https://pib.gov.in