तेज़, निष्पक्ष और सटीक हिंदी समाचार
ज़ोरदारख़बर
तेज़ • निष्पक्ष • सटीक
विदेश•प्रकाशित: 4 नवंबर 2026 को 08:18 am बजे•पर्यावरण & ग्लोबल डेस्क, ज़ोरदार ख़बर

COP29 बाकू जलवायु सम्मेलन: भारत और विकासशील देशों की दो-टूक, विकसित देश तय करें $1 ट्रिलियन का सालाना फंड

अज़रबैजान के बाकू में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP29) में भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज़ उठाते हुए नए कलेक्टिव क्वांटिफाइड गोल (NCQG) के तहत विकसित देशों से प्रति वर्ष 1 ट्रिलियन डॉलर के रियायती जलवायु वित्तपोषण की प्रतिबद्धता की मांग की है। भारत ने स्पष्ट किया कि बिना पर्याप्त वित्तीय सहयोग के ऊर्जा परिवर्तन असंभव है।

📢शेयर करें:WhatsApp
COP29 बाकू जलवायु सम्मेलन भारत

COP29 बाकू: भारत ने विकसित देशों से $1 ट्रिलियन जलवायु फंड की मांग की

अज़रबैजान की राजधानी बाकू में शुरू हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन के 29वें सत्र (COP29) में भारत ने ऐतिहासिक कार्बन उत्सर्जन के लिए उत्तरदायी अमीर देशों को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास कराया। भारतीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि विकासशील देशों में हरित ऊर्जा संक्रमण और जलवायु अनुकूलन (Adaptation) के लिए सालाना कम से कम एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर ($1 Trillion) का नया जलवायु वित्त लक्ष्य (NCQG) तय किया जाना चाहिए।

ऋण नहीं, अनुदान और रियायती दरों पर हो वित्तपोषण

भारत की ओर से पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने ज़ोर देकर कहा कि मौजूदा जलवायु सहायता का अधिकांश हिस्सा वाणिज्यिक कर्ज़ों के रूप में दिया जाता है, जिससे विकासशील देशों पर ऋण संकट का बोझ बढ़ता है। भारत ने मांग की कि नया वित्तपोषण तंत्र रियायती शर्तों और सार्वजनिक अनुदानों पर आधारित होना चाहिए ताकि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं को त्वरित गति से ज़मीनी स्तर पर उतारा जा सके।

भारतीय पक्ष ने रेखांकित किया कि भारत ने बिना किसी बाहरी सहायता के अपने गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता लक्ष्यों को समय से पहले हासिल किया है। यदि विकसित देश 2009 में किए गए वादे के अनुरूप पर्याप्त धन और तकनीक का हस्तांतरण सुनिश्चित करते हैं, तो पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को प्राप्त करने की वैश्विक गति दोगुनी हो सकती है।

📢शेयर करें:WhatsApp

🔗सत्यापित स्रोत एवं संदर्भ (Verified Sources)

टैग्स:#COP29 Baku#Climate Summit#Climate Finance#Global South#India Climate Action