आदित्य-L1 और NASA की बड़ी खोज: सौर तूफानों के 3D फैलाव का रहस्य खुला, अंतरिक्ष मौसम की सटीक भविष्यवाणी संभव
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सौर मिशन आदित्य-L1 और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के संयुक्त डेटा विश्लेषण से सूर्य के कोरोना से निकलने वाले घातक सौर तूफानों (Coronal Mass Ejections - CMEs) के त्रिआयामी फैलाव को लेकर अभूतपूर्व वैज्ञानिक साक्ष्य मिले हैं। आदित्य-L1 के वीईएलसी (VELC) पेलोड ने सौर प्लाज्मा के विस्तार का सटीक गणितीय मॉडल तैयार करने में सफलता प्राप्त की है।

आदित्य-L1 और NASA का कारनामा: सौर तूफानों के 3D फैलाव के खुले रहस्य
पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंज बिंदु एल-1 (L1 Point) पर स्थापित भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला आदित्य-एल1 ने वैश्विक खगोल विज्ञान में नया मील का पत्थर स्थापित किया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने आदित्य-L1 पर स्थापित 'विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ' (VELC) द्वारा दर्ज स्पेक्ट्रोस्कोपिक डेटा और नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (SDO) की हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों का संयुक्त अध्ययन कर सौर तूफानों के असममित 3डी फैलाव का खुलासा किया है।
पृथ्वी के उपग्रहों और पावर ग्रिड की सुरक्षा में क्रांतिकारी मदद
सूर्य की सतह पर होने वाले विशाल विस्फोटों से अरबों टन चुंबकीय प्लाज्मा अंतरिक्ष में तीव्र गति से फैलता है, जिसे कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहा जाता है। अब तक वैज्ञानिक इन तूफानों के दिशात्मक फैलाव का केवल द्वि-आयामी अनुमान लगा पाते थे। आदित्य-एल1 के डेटा ने साबित किया है कि सौर प्लाज्मा समान रूप से फैलने के बजाय चुंबकीय रेखाओं के प्रभाव से एक विशिष्ट कोण पर विक्षेपित होता है।
इस अभूतपूर्व खोज से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे संचार उपग्रहों, जीपीएस प्रणालियों, अंतरिक्ष स्टेशन और पृथ्वी के हाई-वोल्टेज बिजली ग्रिड को सौर आंधी से होने वाले अरबों डॉलर के संभावित नुकसान से पहले ही सुरक्षित किया जा सकेगा। इसरो के वैज्ञानिकों ने इस शोध को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजा है।
🔗सत्यापित स्रोत एवं संदर्भ (Verified Sources)
- Indian Space Research Organisation (ISRO):https://isro.gov.in
- National Aeronautics and Space Administration (NASA):https://nasa.gov