Iran War Impact on India: Indian Rupee में ऐतिहासिक गिरावट, क्या अब मंहगा होगा खाना?

Tarun
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Iran War Impact on India: Indian Rupee में ऐतिहासिक गिरावट, क्या अब मंहगा होगा खाना?

West Asia में छिड़े Iran-Israel युद्ध की तपिश अब सीधे भारत के आम आदमी की रसोई तक पहुँचने लगी है। शुक्रवार, 20 March 2026 को Indian Rupee ने इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की, जिससे देशभर के बाजारों में हलचल तेज हो गई है। यह सिर्फ एक Currency का गिरना नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आपके खाने की थाली और महीने के बजट पर पड़ने वाला है।


Strait of Hormuz में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रास्ते पर बहुत अधिक निर्भर है, और अब वहां से आने वाले जहाजों के रुकने से Fuel ही नहीं, बल्कि खाद (Fertilizer) की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में फल, सब्जियां और अनाज के दाम आसमान छू सकते हैं।


Indian Rupee में रिकॉर्ड गिरावट: 93.81 के पार पहुँचा डॉलर

विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में शुक्रवार को अफरा-तफरी का माहौल रहा। US Dollar के मुकाबले Indian Rupee पहली बार 93 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर 93.81 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा गिरा। बाजार बंद होने तक यह 93.71 पर टिका, जो पिछले सत्र के मुकाबले 82 पैसे की बड़ी गिरावट है। इसका सीधा कारण यह है कि युद्ध की वजह से तेल की कीमतें बढ़ी हैं और भारत को तेल खरीदने के लिए अधिक Dollars खर्च करने पड़ रहे हैं।


जब Dollar की मांग बढ़ती है और भारतीय मुद्रा कमजोर होती है, तो हर चीज का आयात (Import) महंगा हो जाता है। Foreign Institutional Investors (FIIs) ने भी भारतीय शेयर बाजार से केवल मार्च महीने में ही 80,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल लिए हैं। निवेशकों के इस पलायन ने Rupee पर दबाव और बढ़ा दिया है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।


Iran War का घटनाक्रम: Strait of Hormuz की नाकेबंदी और तेल का संकट

इस संकट की शुरुआत 28 February 2026 को हुई, जब Iran और Israel के बीच सीधे हमले शुरू हुए। इसके बाद Iran ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है। आपको बता दें कि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और भारत का 90% से ज्यादा LPG आयात इसी पतले समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। 1 March 2026 से यहां शिपिंग गतिविधियां लगभग ठप हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर Brent Crude की कीमतें 110-120 Dollar प्रति बैरल के पास पहुँच गई हैं।


भारत के पास फिलहाल 20 से 25 दिनों का Strategic Petroleum Reserve (आपातकालीन तेल भंडार) मौजूद है। लेकिन अगर खाड़ी देशों से सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो Petrol और Diesel की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी होना तय है। पिछले एक हफ्ते में ही भारत में Commercial LPG सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये तक का इजाफा देखा गया है, जो इस बात का संकेत है कि मुश्किल दिन आने वाले हैं।


खेती और खाने-पीने की चीजों पर वार: क्यों महंगा होगा राशन?

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि युद्ध से सिर्फ तेल महंगा होता है, लेकिन इस बार मामला खाद (Fertilizer) से जुड़ा है। भारत अपनी Urea और अन्य खादों के उत्पादन के लिए Natural Gas का आयात करता है, जो मुख्य रूप से Qatar से आती है। Strait of Hormuz बंद होने से खाद की सप्लाई चेन टूट गई है, जिससे वैश्विक बाजार में Urea की कीमतें $425 से बढ़कर $600 प्रति टन के पार चली गई हैं।


खेती की लागत बढ़ने का मतलब है कि आने वाली खरीफ (Kharif) फसल महंगी होगी। इसके अलावा, भारत Iran से बड़ी मात्रा में सेब (Apples) और सूखे मेवे जैसे पिस्ता और बादाम आयात करता है। व्यापारियों का कहना है कि सप्लाई रुकने से इन चीजों के दाम पहले ही 15-20% बढ़ चुके हैं। Surajmukhi (Sunflower) और सरसों के तेल की कीमतों में भी प्रति लीटर 10 से 15 रुपये की तेजी देखी जा रही है।


आम जनता पर असर और सरकार का रुख

आम उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति "दोहरी मार" जैसी है। एक तरफ कमजोर Rupee की वजह से Mobile, Laptop और अन्य Electronic सामान महंगे होंगे, वहीं दूसरी तरफ महंगा ईंधन (Fuel) माल ढुलाई के दाम बढ़ा देगा। Reserve Bank of India (RBI) लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और Rupee को संभालने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार से Dollars की बिक्री कर रहा है। सरकार ने भी उर्वरक कंपनियों को वैकल्पिक रास्तों से खाद जुटाने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों पर बोझ कम पड़े।


आने वाले समय में मध्यम वर्ग के लिए हवाई सफर भी महंगा हो सकता है क्योंकि Aviation Turbine Fuel (ATF) के दाम बढ़ रहे हैं। इस समय बचत और सोच-समझकर खर्च करना ही सबसे बेहतर रणनीति हो सकती है। युद्ध की स्थिति में अनिश्चितता बनी रहती है, इसलिए बाजार में स्थिरता आने तक महंगाई का यह दबाव महसूस किया जाता रहेगा। सरकार और RBI के कड़े कदमों से ही उम्मीद है कि Rupee की गिरावट पर जल्द ही लगाम लगाई जा सकेगी।

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