भारत और पाकिस्तान ने 10 मई 2025 को नियंत्रण रेखा (LoC) पर सभी सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए सीजफायर का समझौता किया है। यह फैसला 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी। दोनों देशों के DGMO (Director General of Military Operations) के बीच सीधी बातचीत के बाद शाम 5 बजे से युद्ध विराम लागू हो गया। अमेरिका ने इस समझौते का स्वागत किया है, लेकिन यह साफ किया गया कि भारत-पाक के बीच यह समझौता सीधे बातचीत से हुआ है।
DGMO की बातचीत से हुआ समझौता
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि पाकिस्तानी DGMO ने 10 मई को दोपहर 3:35 बजे भारतीय समकक्ष को कॉल कर सीजफायर का प्रस्ताव दिया। भारत ने इसे स्वीकार कर लिया और शाम 5 बजे से दोनों पक्षों ने नियंत्रण रेखा पर सभी सैन्य गतिविधियों को बंद करने पर सहमति जताई। यह पहली बार है जब दोनों देशों के DGMO के बीच इतनी सीधे और सकारात्मक बातचीत हुई है।
पहलगाम आतंकी हमला
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया था। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। यह हमला हाल के वर्षों में सबसे घातक नागरिक हमला माना जा रहा है। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था, लेकिन अब सीजफायर से स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
अमेरिका का स्वागत और शांति प्रयास
अमेरिका ने इस सीजफायर समझौते का स्वागत किया है और दोनों पक्षों से स्थायी शांति स्थापित करने के लिए कदम बढ़ाने को कहा है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि यह भारत-पाक के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते का परिणाम है और वे शांति प्रक्रिया को समर्थन देते हैं।
हालांकि सीजफायर लागू हो गया है, फिर भी दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और कई विवादित मुद्दे बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी शांति के लिए आपसी संवाद और भरोसेमंद कदम जरूरी हैं। फिलहाल यह युद्ध विराम एक सकारात्मक संकेत है, जो क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।
