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व्यापार•प्रकाशित: 3 नवंबर 2026 को 07:08 am बजे•मार्केट डेस्क, ज़ोरदार ख़बर

शेयर बाजार में नया नियम: NSE ने लागू की नई 'क्वांटिटी फ्रीज लिमिट', निफ्टी और बैंक निफ्टी ट्रेडर्स को बड़ा झटका

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने वायदा एवं विकल्प (Futures & Options) ट्रेडिंग में व्यापक बदलाव करते हुए इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए नई 'क्वांटिटी फ्रीज लिमिट' (Quantity Freeze Limits) लागू कर दी है। सेबी (SEBI) के नए रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क के तहत अब एक सिंगल ऑर्डर में निफ्टी के लिए 1,800 यूनिट्स और बैंक निफ्टी के लिए 900 यूनिट्स की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है।

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एनएसई द्वारा निफ्टी और बैंक निफ्टी के लिए नई क्वांटिटी फ्रीज सीमा लागू

NSE ने इंडेक्स एफएंडओ के लिए लागू की नई क्वांटिटी फ्रीज लिमिट

भारतीय शेयर बाज़ार के डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले लाखों खुदरा और संस्थागत निवेशकों के लिए बड़ा बदलाव प्रभावी हो गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने एक आधिकारिक परिपत्र जारी करते हुए प्रमुख सूचकांकों के वायदा और विकल्प अनुबंधों के लिए संशोधित 'क्वांटिटी फ्रीज लिमिट' को लागू कर दिया है।

नए इंडेक्स-वार फ्रीज सीमा के आंकड़े

एनएसई के नए सर्कुलर के मुताबिक, सिंगल पंच ऑर्डर में अधिकतम अनुमत क्वांटिटी को निम्नानुसार सीमित किया गया है:

क्यों लागू किया गया यह नियम?

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) का उद्देश्य डेरिवेटिव बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी, फ्लैश क्रैश की घटनाओं और एल्गो-ट्रेडिंग की असामान्य वोलैटिलिटी पर अंकुश लगाना है। जब कोई ट्रेडर इन सीमाओं से अधिक क्वांटिटी का सिंगल ऑर्डर पंच करने का प्रयास करेगा, तो एक्सचेंज का ट्रेडिंग टर्मिनल उस ऑर्डर को तुरंत रिजेक्ट (Reject) कर देगा।

ट्रेडर्स और ब्रोकरों के लिए निर्देश

देश के प्रमुख ब्रोकरेज हाउसों (जैसे ज़ेरोधा, ग्रो, एंजेल वन और कोटक सिक्योरिटीज) ने अपने ऑटोमेटेड ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर और एपीआई (API) को नए फ्रीज नियमों के अनुसार अपडेट कर दिया है। बड़े वॉल्यूम पर काम करने वाले ट्रेडर्स को अब अपने बड़े ऑर्डर्स को स्लाइस (Slice) करके कई भागों में निष्पादित करना होगा।

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🔗सत्यापित स्रोत एवं संदर्भ (Verified Sources)

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