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देश•प्रकाशित: 3 नवंबर 2026 को 06:33 am बजे•डिफेंस डेस्क, ज़ोरदार ख़बर

नौसेना के लिए ऐतिहासिक डील: ₹53,866 करोड़ में बनेंगे 8 नेक्स्ट-जेनरेशन युद्धपोत, GRSE और गोवा शिपयार्ड को मिला रक्षा ठेका

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की समुद्री मारक क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए ₹53,866.50 करोड़ के ऐतिहासिक रक्षा अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत आठ नेक्स्ट-जेनरेशन कोरवेट्स (NGC) का स्वदेशी निर्माण किया जाएगा, जिसमें 5 युद्धपोत जीआरएसई कोलकाता और 3 युद्धपोत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड बनाएंगे।

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भारतीय नौसेना के नेक्स्ट जेनरेशन कोरवेट्स युद्धपोत परियोजना

₹53,866 करोड़ की लागत से बनने वाले 8 नेक्स्ट-जेनरेशन स्टील्थ कोरवेट्स

भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की सामरिक ताकत को नया आयाम देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने ₹53,866.50 करोड़ (लगभग 5.6 अरब डॉलर) के ऐतिहासिक रक्षा सौदे को अंतिम रूप दिया है। इस सौदे के अंतर्गत भारतीय नौसेना के लिए 8 नेक्स्ट-जेनरेशन कोरवेट्स (NGCs) का निर्माण पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक के साथ किया जाएगा।

जीआरएसई और गोवा शिपयार्ड के बीच काम का बंटवारा

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, गार्डन रीच शिपbuilders एंड इंजीनियर्स (GRSE) कोलकाता को 5 कोरवेट्स के निर्माण की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) शेष 3 उन्नत कोरवेट्स तैयार करेगा। यह पहली बार है जब भारतीय नौसेना के इन-हाउस वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार स्वदेशी डिजाइन पर प्रतिस्पर्धी बोली के ज़रिए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) को निर्माण का दायित्व मिला है।

स्टील्थ तकनीक, एंटी-सबमरीन रडार और अत्याधुनिक मिसाइलें

ये नेक्स्ट-जेनरेशन युद्धपोत अत्यधिक उन्नत स्टील्थ तकनीक से लैस होंगे, जिससे ये दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आएंगे। इन पर लंबी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन वारफेयर सिस्टम, एयर डिफेंस मिसाइलें और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्धक हथियार तैनात होंगे। ये युद्धपोत तटीय रक्षा, समुद्री गश्त, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर आक्रामक ऑपरेशनों को अंजाम देने में सक्षम होंगे।

आत्मनिर्भर भारत और 530 लाख मानव-दिवस रोजगार

इस महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना से देश के रक्षा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को ज़बरदस्त बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के 10 वर्षों के कार्यकाल के दौरान शिपयार्ड्स पर लगभग 72 लाख मानव-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार और सहायक एमएसएमई उद्योगों में 460 लाख मानव-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

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🔗सत्यापित स्रोत एवं संदर्भ (Verified Sources)

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