ट्रंप का परमाणु युद्ध टालने का दावा और भारत का तीखा पलटवार

Tarun
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। पिछले 24 घंटों के दौरान अपने 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (SOTU) संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़ने वाला संभावित परमाणु युद्ध उनकी मध्यस्थता के कारण टला। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते तो इस संघर्ष में करीब 3.5 करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में शांति बहाली की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इन दावों को पूरी तरह से काल्पनिक बताते हुए स्पष्ट किया है कि संघर्ष विराम का निर्णय दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था, न कि किसी तीसरे पक्ष के दबाव का।

ट्रंप का परमाणु युद्ध टालने का दावा और भारत का तीखा पलटवार


दावे की हकीकत: 3.5 करोड़ मौतें और 'फोन कॉल' डिप्लोमेसी

वाशिंगटन में कांग्रेस को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि उनके पास पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का संदेश आया था, जिसमें उन्होंने ट्रंप को 'रक्षक' बताया। ट्रंप के अनुसार, "भारत और पाकिस्तान एक भीषण परमाणु युद्ध की कगार पर थे। मैंने दोनों देशों के नेताओं को फोन किया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर जंग नहीं रुकी तो अमेरिका उनके साथ तमाम व्यापारिक संबंध और सौदे खत्म कर देगा।" ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिसके डर से दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस हस्तक्षेप ने न केवल करोड़ों लोगों को बचाया बल्कि शहबाज शरीफ की कुर्सी और जान की भी रक्षा की। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने ट्रंप के '3.5 करोड़ मौतों' के आंकड़े को अतिरंजित करार दिया है।


फ्लैशबैक 2025: 'ऑपरेशन सिंदूर' और वो चार दिन का तनाव

यह पूरा विवाद मई 2025 के उस सैन्य गतिरोध से जुड़ा है, जो पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था। 22 अप्रैल 2025 को हुए हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी, जिसके जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। भारतीय वायुसेना और थल सेना ने पाकिस्तान के भीतर आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिससे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी। 10 मई 2025 को दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच हॉटलाइन पर हुई बातचीत के बाद संघर्ष विराम लागू हुआ था। ट्रंप अब इसी घटना का श्रेय खुद को दे रहे हैं, जबकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमेशा यह कहा है कि यह एक द्विपक्षीय समाधान था और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की भूमिका नहीं थी।


भारत का कड़ा रुख और कूटनीतिक भविष्य

ट्रंप के इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि भारत अपनी संप्रभुता और द्विपक्षीय मुद्दों पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पूर्व में भी ट्रंप के ऐसे दावों को 'हवा-हवाई' बताया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप अपनी घरेलू राजनीति और 'शांतिदूत' की छवि चमकाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान की ओर से इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है, जहां कुछ हलकों में ट्रंप की प्रशंसा की जा रही है। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका के ये दावे भारत-अमेरिका के बीच मौजूदा व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों पर कोई असर डालते हैं, विशेषकर तब जब अमेरिका पहले ही भारतीय सोलर उत्पादों पर भारी टैरिफ लगा चुका है।


निष्कर्ष के तौर पर, ट्रंप का यह बयान कूटनीति से ज्यादा चुनावी और व्यक्तिगत प्रचार का हिस्सा नजर आता है। भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की संभावना हमेशा एक वैश्विक चिंता रही है, लेकिन मई 2025 के संकट को जिस तरह से ट्रंप ने 'अकेले सुलझाने' का दावा किया है, वह ऐतिहासिक तथ्यों और जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाता। भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' पर कायम है और स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद और द्विपक्षीय विवादों का समाधान केवल सीधे संवाद से ही संभव है। जनता के लिए यह खबर एक चेतावनी भी है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बयानों के पीछे के राजनीतिक हितों को समझना बेहद जरूरी है।

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