भारत और कनाडा के बीच पिछले दो वर्षों से जारी कूटनीतिक गतिरोध अब खत्म होने की कगार पर है। कनाडा की नई सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि वह अब भारत को देश के भीतर होने वाली हिंसक गतिविधियों या अपराधों से नहीं जोड़ती है। यह बयान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की पहली भारत यात्रा से ठीक 24 घंटे पहले आया है, जिसे द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़े 'पिघलाव' (Thaw) के रूप में देखा जा रहा है। ओटावा के इस यू-टर्न ने न केवल कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, बल्कि यह संकेत भी दिया है कि कार्नी सरकार पूर्ववर्ती जस्टिन ट्रूडो प्रशासन की विवादित नीतियों से किनारा कर एक नई और व्यावहारिक (Pragmatic) विदेश नीति की ओर बढ़ रही है।
बड़ा बयान: "अब सक्रिय हस्तक्षेप की कोई आशंका नहीं"
बुधवार रात ओटावा में एक विशेष मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कनाडा के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की कि भारत के साथ सुरक्षा वार्ता और राजनयिक जुड़ाव अब "मजबूत और सकारात्मक" स्तर पर पहुंच गया है। अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमें विश्वास है कि भारत की ओर से कनाडाई धरती पर कोई भी अवांछित गतिविधि अब जारी नहीं है। अगर हमें ऐसा लगता, तो प्रधानमंत्री कार्नी इस समय भारत की यात्रा पर नहीं जा रहे होते।" यह बयान उन आरोपों के विपरीत है जो 2023 और 2024 में लगाए गए थे, जब हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। कनाडाई प्रशासन का यह नया आकलन दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSAs) के बीच हुई निरंतर बातचीत का परिणाम माना जा रहा है।
पीएम मार्क कार्नी की भारत यात्रा: निवेश और व्यापार पर नजर
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज मुंबई पहुंच रहे हैं, जहां से उनके नौ दिवसीय महत्वपूर्ण भारत दौरे की शुरुआत होगी। कार्नी का यह दौरा केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुंबई में वे भारतीय उद्योग जगत के दिग्गजों और कनाडाई पेंशन फंड के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद, 2 मार्च को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच 'व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते' (CEPA) को तेज करने पर चर्चा होगी। कनाडा का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 30 अरब डॉलर से बढ़ाकर 70 अरब डॉलर तक ले जाना है। कार्नी की इस यात्रा को कनाडाई अर्थव्यवस्था को अमेरिकी निर्भरता से मुक्त कर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विविधता लाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सुरक्षा संवाद और भविष्य की संभावनाएं
भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने भी इस बदलाव का स्वागत करते हुए इसे "परिपक्व लोकतंत्रों की जीत" बताया है। उन्होंने पुष्टि की है कि भारत और कनाडा अब 'रियल-टाइम' सुरक्षा सहयोग की दिशा में बढ़ रहे हैं, जिसमें साइबर अपराध, अवैध आप्रवासन और संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई शामिल है। हालांकि, कनाडा के भीतर मौजूद कुछ अलगाववादी समूहों ने इस कूटनीतिक सुधार का विरोध किया है, लेकिन कार्नी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा चिंताओं और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कार्नी के नेतृत्व में कनाडा अब भारत को एक 'रणनीतिक भागीदार' के रूप में देख रहा है, न कि एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में, जो दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के लिए एक शुभ संकेत है।
कनाडा का यह आधिकारिक रुख भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। पिछले दो सालों से भारत पर लगे आरोपों का बादल अब छंटता दिख रहा है। मार्क कार्नी की यात्रा न केवल पुराने विवादों को पीछे छोड़ने का अवसर है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रक्षा जैसे क्षेत्रों में नए सहयोग की शुरुआत भी है। कनाडाई सरकार का यह स्वीकारोक्ति कि 'भारत अब अपराधों से नहीं जुड़ा है', दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बहाली की दिशा में सबसे ठोस कदम है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह 'नया अध्याय' भारत और कनाडा की साझेदारी को कितनी ऊंचाई पर ले जाता है।

