ड्रोन और हवाई घुसपैठ से निपटेगी सेना: रक्षा मंत्रालय ने BEL के साथ 770 करोड़ रुपये का किया रडार सौदा
सीमा पर कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों और मानवरहित ड्रोनों की निगरानी मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ उन्नत हल्के रडार (LLLR-I) की आपूर्ति का अनुबंध किया है।

सेना के उन्नत हल्के रडार का प्रतीकात्मक इलस्ट्रेशन
उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर दुश्मन के छोटे ड्रोनों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों का मुकाबला करने के लिए भारतीय सेना को अत्याधुनिक रडार प्रणाली मिलने जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ लगभग 770 करोड़ रुपये के अनुबंध पर औपचारिक हस्ताक्षर किए हैं।
पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में तैनाती के अनुकूल
सेना को मिलने वाले इन 'इम्प्रूव्ड लो-लेवल लाइट वेट रडार' (LLLR-I) को विशेष रूप से पहाड़ी और ऊंचे इलाकों में त्वरित तैनाती के लिए डिजाइन किया गया है। इनका हल्का वजन और मॉड्यूलर संरचना जवानों को बेहद कम समय में अग्रिम चौकियों पर रडार स्थापित करने में सक्षम बनाती है।
सटीक ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-उपाय
रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह रडार सूक्ष्म और छोटे ड्रोनों (Micro & Mini UAVs), हेलीकॉप्टरों और क्रूज मिसाइलों को प्रतिकूल मौसम और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के दौरान भी कई किलोमीटर दूर से ट्रैक करने में सक्षम है। इसे सेना की मौजूदा वायु रक्षा कमान प्रणाली से एकीकृत किया जाएगा।
रक्षा निर्माण में 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा
इस परियोजना के तहत 80 प्रतिशत से अधिक कलपुर्जे और उप-प्रणालियां स्वदेशी एमएसएमई (MSME) और भारतीय निजी उद्योगों से प्राप्त की जाएंगी, जिससे घरेलू रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को प्रत्यक्ष बढ़ावा मिलेगा।
🔗सत्यापित स्रोत एवं संदर्भ (Verified Sources)
- Press Information Bureau (PIB), Ministry of Defence:https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2066781