ईरान पर अमेरिका-इजरायल का भीषण हमला, सुप्रीम लीडर खमेनेई की मौत

Tarun
लेखक:
0

मध्य पूर्व में इस वक्त एक अभूतपूर्व और विनाशकारी युद्ध की आग भड़क उठी है। अमेरिका और इजरायल ने एक संयुक्त सैन्य अभियान के तहत ईरान पर अब तक का सबसे भीषण हमला किया है, जिसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का नाम दिया गया है। इस महाविनाशकारी एयरस्ट्राइक में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खमेनेई के मारे जाने की पुष्टि हुई है। खमेनेई की मौत ने पूरे इलाके में भूचाल ला दिया है, और इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल तथा खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इस अप्रत्याशित संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल मच गई है। कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। यह स्थिति दुनिया भर के लोगों के लिए बेहद चिंताजनक है क्योंकि कई प्रमुख एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं और एयरस्पेस बंद हो गए हैं। यह केवल क्षेत्रीय तनाव नहीं बल्कि वैश्विक संकट बन चुका है।

ईरान पर अमेरिका-इजरायल का भीषण हमला, सुप्रीम लीडर खमेनेई की मौत

हमले की मुख्य जानकारी और मौजूदा हालात

शनिवार को शुरू हुए इस सैन्य अभियान में इजरायल और अमेरिका ने अत्याधुनिक हथियारों, बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स और भारी बमों का इस्तेमाल करते हुए ईरान के सैन्य ठिकानों, बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्यालयों को निशाना बनाया। इस भयानक बमबारी का मुख्य लक्ष्य ईरान की सत्ता को पलटना और उसके परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए नष्ट करना बताया जा रहा है। हमलों के दौरान तेहरान में एक सुरक्षित परिसर को तबाह कर दिया गया, जहां अयातुल्लाह अली खमेनेई मौजूद थे। इजरायली प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त रूप से इस बात के संकेत दिए कि खमेनेई अब जीवित नहीं हैं। इसके तुरंत बाद ही लेबनान से ईरान समर्थित गुट हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर बड़े पैमाने पर रॉकेट दागने शुरू कर दिए, जिससे एक साल से चला आ रहा युद्धविराम भी पूरी तरह टूट गया। ईरान के जवाबी हमलों में दुबई, दोहा और बहरीन में भी धमाकों की गूंज सुनी गई है। कुवैत में मौजूद तीन अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की भी पुष्टि पेंटागन द्वारा कर दी गई है। यह इस संघर्ष में अमेरिका के लिए पहली बड़ी सैन्य क्षति है। नागरिक हताहतों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और ईरानी मीडिया के अनुसार अब तक लगभग 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।


तनाव का घटनाक्रम और युद्ध की पृष्ठभूमि

इस महायुद्ध की नींव लंबे समय से चल रही कूटनीतिक विफलताओं और परमाणु वार्ता के टूटने के कारण रखी गई थी। जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत जब बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई, तब तनाव अपने चरम पर पहुंच गया। ओमान की मध्यस्थता के बावजूद, ईरान द्वारा अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को रोकने से इनकार करने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई का मन बना लिया। 28 फरवरी 2026 की अलसुबह 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की शुरुआत हुई। अमेरिका और इजरायल के लड़ाकू विमानों ने अचानक ईरान के रक्षा तंत्र को भेदते हुए राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों पर बम बरसाने शुरू कर दिए। पहले ही दिन ईरान के कई प्रमुख रडार सिस्टम और नेवल बेस नष्ट कर दिए गए। इसके ठीक बाद अयातुल्लाह अली खमेनेई के मारे जाने की खबर आई। रविवार और सोमवार तक युद्ध का दायरा लेबनान, कुवैत और यूएई तक फैल गया। हिजबुल्लाह ने खमेनेई की मौत का बदला लेने के लिए इजरायल पर ड्रोन्स और मिसाइलों से हमला किया, जिसके जवाब में इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में भारी बमबारी की, जिससे लाखों लोगों को वहां से पलायन करना पड़ा। ईरान की सेना ने 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' को वाणिज्यिक जहाजों के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया है, जो दुनिया भर में तेल की सप्लाई का सबसे प्रमुख मार्ग है। इसी कारण विश्व स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। अब यह युद्ध एक लंबे क्षेत्रीय संघर्ष में तब्दील हो गया है।


प्रशासनिक रुख और भविष्य की आशंकाएं

इस बड़े सैन्य हमले के बाद अमेरिकी और इजरायली नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यह सैन्य अभियान उम्मीद से अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है और जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और कट्टरपंथी शासन को पूरी तरह से उखाड़ नहीं फेंका जाता, तब तक हमले जारी रहेंगे। उन्होंने ईरानी जनता से भी अपील की है कि वे अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरें और सत्ता परिवर्तन में सहयोग करें। दूसरी ओर, इजरायली रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ऐलान किया है कि आने वाले दिनों में ईरान और हिजबुल्लाह के खिलाफ उनके हवाई हमले "बिना रुके" जारी रहेंगे। वहीं, ईरान के हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। खमेनेई की मौत के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नेतृत्व में एक अंतरिम परिषद का गठन किया गया है ताकि देश का शासन चलाया जा सके। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत या समझौते की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ अमेरिका और इजरायल दोनों को इसका माकूल जवाब देगा। बयानों से साफ है कि युद्ध रुकेगा नहीं।


कुल मिलाकर, अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किया गया 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अब पूरी दुनिया के लिए एक भयंकर चुनौती बन चुका है। ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत ने इस संघर्ष को एक ऐसा मोड़ दे दिया है, जहां से वापसी का कोई रास्ता नजर नहीं आता। आम नागरिक इस भयानक युद्ध की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। खाड़ी देशों में हवाई यातायात ठप हो गया है और वैश्विक व्यापार पर मंडराते खतरे ने अर्थव्यवस्थाओं को अस्थिर कर दिया है। तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनियाभर में महंगाई का नया संकट खड़ा कर दिया है। फिलहाल कूटनीति के सभी दरवाजे बंद दिख रहे हैं और हथियारों की होड़ हावी है। यदि जल्द ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध की आहट बन सकता है, जिसका खामियाजा कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn more
Ok, Go it!