क्या आपने भी हाल ही में स्विगी या जोमैटो से खाना आर्डर किया और डिलीवरी में काफी देरी हुई? दरअसल, मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहे युद्ध का सीधा असर अब भारत की रसोई और रेस्टोरेंट्स पर पड़ने लगा है। देश भर में कमर्शियल LPG गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत हो गई है, जिसके चलते कई होटल्स और छोटे भोजनालय बंद होने की कगार पर आ गए हैं। यह संकट केवल बड़े होटलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आपके आस-पास के ढाबे, स्ट्रीट वेंडर्स और फूड डिलीवरी ऐप्स भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। अगर आप इन दिनों बाहर खाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है।
असल में क्या हुआ
कमर्शियल LPG की सप्लाई में अचानक आई इस रुकावट ने हॉस्पिटैलिटी सेक्टर (hospitality sector) की कमर तोड़ दी है। बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में कई छोटे रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन अपना काम अस्थायी रूप से बंद करने को मजबूर हो गए हैं, क्योंकि उनके पास खाना पकाने के लिए गैस ही नहीं बची है। एक स्रोत के अनुसार, बेंगलुरु के कई पीजी (PGs) ने तो अपने मेन्यू से डोसा, पूरी और चपाती जैसी गैस-खर्च करने वाली चीजें हटा दी हैं और सिर्फ चावल आधारित भोजन परोस रहे हैं।
होटल मालिकों का कहना है कि बिना गैस के पूरी क्षमता से काम करना लगभग नामुमकिन है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा वहां काम करने वाले कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी दिहाड़ी और नौकरियां खतरे में आ गई हैं। साथ ही, फूड डिलीवरी ऐप्स पर भी ऑर्डर्स पूरे नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि रेस्टोरेंट्स की किचन का काम धीमा पड़ गया है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
इस बड़े संकट की असल वजह भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच चल रहा तनाव है। 12 मार्च 2026 की ताज़ा स्थिति के अनुसार, इस युद्ध के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) का अहम समुद्री रास्ता बाधित हो गया है। इसी रास्ते से भारत अपनी अधिकांश गैस का इम्पोर्ट करता है। सप्लाई रुकने से भारत के गैस बाज़ार में अचानक हाहाकार मच गया।
जैसे ही कमर्शियल गैस की कमी की खबरें फैलीं, लोगों में पैनिक हो गया और घरों के घरेलू सिलेंडरों की बुकिंग भी अचानक बढ़ गई। सरकार ने तुरंत स्थिति को कंट्रोल करने के लिए घरेलू गैस बुकिंग के बीच का अनिवार्य गैप 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है ताकि गैस की जमाखोरी (hoarding) को सख्ती से रोका जा सके। कल्पना के तौर पर सोचिए, आपके मोहल्ले का वह समोसे वाला जो रोज़ शाम को ठेला लगाता था, आज उसे गैस न मिलने की वजह से अपना काम रोकना पड़ा है। यह इस समय देश के हज़ारों छोटे कारोबारियों की असल कहानी है जो रोज़ कमाते और खाते हैं।
सरकार या अधिकारियों का क्या कहना है
इस गम्भीर स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने तुरंत कड़े और अहम कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि अस्पतालों, आवश्यक सेवाओं और आम घरेलू उपभोक्ताओं को सबसे पहले गैस की सप्लाई मिले, ताकि आम घरों के चूल्हे न बुझें।
प्रशासन ने कहा है कि तेल रिफाइनरियों (oil refineries) को गैस का उत्पादन तुरंत बढ़ाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। 8 मार्च के आदेश के बाद से घरेलू उत्पादन में 25% तक की वृद्धि की जा चुकी है। इसके साथ ही, मंत्रियों ने जनता से अपील की है कि स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की कोई बात नहीं है। भारत अब अपनी सप्लाई को स्थिर करने के लिए अन्य देशों से भी एलपीजी इम्पोर्ट करने के नए रास्ते तलाश रहा है।
यह कमर्शियल गैस संकट निश्चित रूप से आने वाले कुछ दिनों तक हमारी आम ज़िंदगी, खासकर बाहर खाने की आदतों और डिलीवरी सेवाओं पर असर डालेगा। हालांकि, यह जानना राहत की बात है कि सरकार ने आम घरों की रसोई गैस की सप्लाई को पूरी तरह से सुरक्षित रखा है, इसलिए पैनिक में आकर एक्स्ट्रा बुकिंग करने की कोई ज़रूरत नहीं है। फिलहाल के लिए बेहतर यही है कि बाहर के खाने पर निर्भरता थोड़ी कम करें और स्थिति के जल्द ही सामान्य होने का इंतज़ार करें।

