खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम: ₹1,856 करोड़ की योजना से देश में बनेंगे विश्वस्तरीय खेल उपकरण
भारत को खेल उपकरणों का अग्रणी विनिर्माता और निर्यातक बनाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2033-34 तक ₹1,856.67 करोड़ के परिव्यय वाली नई योजना को मंजूरी दी है।

खेलो इंडिया खेल सामान निर्माण प्रोत्साहन योजना का आधिकारिक फैसला
भारतीय खेल क्षेत्र को बुनियादी स्तर से मजबूत करने और वैश्विक खेल सामान बाजार में देश की साख स्थापित करने के लिए एक नई औद्योगिक योजना को औपचारिक स्वीकृति मिल गई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' को मंजूरी दी है, जिसका कुल वित्तीय आकार 1,856.67 करोड़ रुपये है।
मेरठ और जालंधर के पारंपरिक खेल उद्योगों को नई तकनीक
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अनुसार, यह योजना विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ और पंजाब के जालंधर जैसे पारंपरिक खेल निर्माण केंद्रों के आधुनिकरण पर केंद्रित है। इसके तहत उच्च गुणवत्ता वाले क्रिकेट बैट, फुटबॉल, बैडमिंटन रैकेट, एथलेटिक्स उपकरण और सुरक्षात्मक गियर के निर्माण हेतु अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और टेस्टिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
आयात प्रतिस्थापन और निर्यात को बढ़ावा
वर्तमान में भारत ओलंपिक स्तर के कई उच्च-स्तरीय खेल उपकरणों का आयात करता है। इस योजना का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों (जैसे FIFA, FIH, BWF) द्वारा प्रमाणित गुणवत्ता वाले उपकरणों का निर्माण देश के भीतर सुनिश्चित करना है, जिससे आने वाले 8 वर्षों में खेल सामानों के निर्यात में तीन गुना वृद्धि का अनुमान है।
कारीगरों और एमएसएमई को वित्तीय सहायता
योजना के अंतर्गत छोटे उद्यमों (MSMEs) और स्थानीय कारीगरों को उन्नत मशीनरी खरीदने पर 25 से 30 प्रतिशत तक की क्रेडिट-लिंक्ड पूंजीगत सब्सिडी और ब्याज छूट का लाभ दिया जाएगा।
🔗सत्यापित स्रोत एवं संदर्भ (Verified Sources)
- Press Information Bureau (PIB), Ministry of Youth Affairs and Sports:https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2068785