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व्यापार•प्रकाशित: 1 नवंबर 2026 को 07:25 am बजे•बिजनेस डेस्क, ज़ोरदार ख़बर

जीएसटी नियमों में 1 नवंबर से बड़े बदलाव: ई-कॉमर्स सप्लायर्स को बड़ी राहत, इनवर्टेड ड्यूटी रिफंड आसान

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 1 नवंबर 2026 से वस्तु एवं सेवा कर (GST) के नियमों में महत्वपूर्ण सुधार लागू कर दिए हैं। ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के माध्यम से सामान बेचने वाले सूक्ष्म उद्यमों के पंजीकरण नियमों को सरल बनाया गया है, जबकि इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में 90% तक त्वरित रिफंड की सुविधा दी गई है।

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जीएसटी कर प्रणाली और 1 नवंबर से लागू नए वित्तीय सुधार

जीएसटी नियमों में संशोधन से ई-कॉमर्स विक्रेताओं और एमएसएमई को सीधा लाभ

जीएसटी परिषद की 54वीं और 55वीं बैठक की सिफारिशों के अनुरूप केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 1 नवंबर 2026 से कर अनुपालन को सुगम बनाने वाले कई प्रावधानों को अधिसूचित कर दिया है। इन नए नियमों का प्राथमिक उद्देश्य छोटे और मध्यम व्यापारियों (MSMEs) के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर व्यवसाय करने की बाधाओं को दूर करना तथा अटके हुए टैक्स रिफंड को तेज गति से जारी करना है।

ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए सरल पंजीकरण और पीपीओबी छूट

नए दिशानिर्देशों के तहत जो छोटे विक्रेता अमेज़न, फ्लिपकार्ट या मीशो जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए अंतर-राज्यीय बिक्री करते हैं, उन्हें अब प्रत्येक राज्य में अलग भौतिक कार्यालय (Principal Place of Business) स्थापित करने की अनिवार्यता से बड़ी छूट मिल गई है। वर्चुअल ऑफिस और शेयर्ड वेयरहाउस एड्रेस के आधार पर सिंगल जीएसटीएन पंजीकरण मान्य होगा, जिससे देश के दूरदराज के कारीगरों और छोटे उत्पादकों के अनुपालन खर्च में भारी कमी आएगी।

इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में 90% तक त्वरित रिफंड

टेक्सटाइल, फर्टिलाइजर और ऑटो पार्ट्स जैसे उद्योगों के लिए जहां कच्चे माल पर टैक्स दर तैयार उत्पाद से अधिक है, वहां रिफंड प्रक्रिया को स्वचालित कर दिया गया है। करदाताओं द्वारा आवेदन दाखिल करने के 7 कार्यदिवसों के भीतर कुल रिफंड दावे का 90% हिस्सा अनंतिम (provisional) तौर पर बैंक खाते में जमा कर दिया जाएगा, जिससे कार्यशील पूंजी की किल्लत दूर होगी।

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🔗सत्यापित स्रोत एवं संदर्भ (Verified Sources)

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