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विदेश•प्रकाशित: 30 अक्टूबर 2026 को 04:50 pm बजे•News Desk

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख से बाज़ारों में हलचल: जानें भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर असर

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बदलाव के संकेतों से अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी और मुद्रा बाज़ारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। ब्रेंट क्रूड 72 से 74 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है।

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वैश्विक तेल टैंकर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय का प्रतीकात्मक चित्र

अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर सूचकांक में स्थिरता

वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में आज दोहरे घटनाक्रमों का प्रभाव देखा गया। एक ओर पश्चिम एशिया के समुद्री तेल मार्गों पर तनाव के कारण आपूर्ति संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका में मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक कटौती की संभावनाओं को सीमित कर दिया है।

ब्रेंट क्रूड का 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ठहराव

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव $72.80 प्रति बैरल पर स्थिर रहा, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $68.60 के आसपास कारोबार करता दिखा। ओपेक प्लस (OPEC+) देशों द्वारा उत्पादन नीतियों पर सतर्क रुख बनाए रखने से तेल की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट नहीं आ सकी है।

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती और भारतीय रुपया

फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठकों में ब्याज दरों पर सतर्क रुख की संभावना से अमेरिकी डॉलर सूचकांक 104 के स्तर पर मजबूत बना हुआ है। इसके प्रभाव से उभरते बाज़ारों की मुद्राओं पर दबाव रहा। हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पास मौजूद $680 अरब से अधिक के मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार के चलते भारतीय रुपया 84.05 से 84.10 के अत्यंत सीमित दायरे में स्थिर बना रहा।

भारत के व्यापार घाटे और आयात बिल पर संतुलन

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, जब तक ब्रेंट क्रूड $75 से $80 प्रति बैरल के नीचे बना रहता है, तब तक भारत के चालू खाता घाटे (CAD) और खुदरा महंगाई पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

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🔗सत्यापित स्रोत एवं संदर्भ (Verified Sources)

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